एफडीए ने एस्ट्राजेनेका की मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार प्रणाली को दी मंजूरी

वाशिंगटन, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक संस्था फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कमजोर प्रतिरक्षा वाले कोविड पीड़ित मरीजों के लिए एस्ट्राजेनेका की मोनोक्लोनल एंटीबॉडी पद्धति को आपातकालीन स्थिति के लिए मंजूरी दे दी है।

एस्ट्राजेनेका की एवुशील्ड मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल में दो तत्वों का मिश्रण हैं और इन्हें इंजेक्शन के माध्यम से दिया जा सकता है। इन्हें 12 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों तथा जिन्हें अभी तक सार्स कोविड-2 का संक्र मण नहीं हुआ है और जो लोग सार्स कोविड-2 संक्रमित लोगों के संपर्क में नहीं आए हैं , उन सभी को एहतियात के तौर पर संक्रमण से पूर्व दिए जाने की मंजूरी दी गई है।

अभी तक प्रयोगशाला में उत्पादित मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को कोविड -19 मरीजों के शुरूआती चरण के उपचार अथवा उन लोगों को दिया जाता था जो कोरोना संक्रमित लोगों के संपर्क में आ चुके हैं तथा जो गंभीर जोखिम वाली श्रेणी में माने जाते थे।

एफडीए के सेंटर फॉर ड्रग इवेल्युएशन एंड रिसर्च की निदेशक पेट्रीजिया कावाजोनी ने जारी एक बयान में कहा कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीन सर्वोत्तम सुरक्षा प्रदान करती हैं लेकिन कुछ मरीजों की शरीर प्रतिरक्षा प्रणाली काफी कमजोर होती हैं और वैक्सीन के बाद इनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी नहीं बन पाती हैं , अथवा ऐसे लोगों जिन्हें कोरोना वैक्सीन से गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं उनमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज एक रोकथाम विकल्प के तौर पर काम कर सकती है।

उन्होंने बताया आज जो मंजूरी दी गई है उसमें दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया है जो कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों में कोरोना के खतरे को कम करती हैं। एवुशील्ड के एक डोज में दोनों एंटीबॉडी का एक- एक इंजेक्शन दिया जाता है और यह छह महीने तक कोरोना के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकता है। यह पद्धति उन लोगों के लिए भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है जिन्हें कोरोना वैक्सीन या इसके किसी घटक से कोई गंभीर एलर्जी है लेकिन जिन मरीजों को कोराना वैक्सीन लगाए जाने की सिफारिश पहले ही कर दी गई है उनमें एंटीबाडी पद्धति कोई विकल्प नहीं है। इस कॉकटेल में दो एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया गया है जिनमें टिक्साजेविमाब और किल्गाविमाब हैं और ये दोनों सार्स- कोविड-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ कारगर हैं। इन्हें इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि ये कोरोना वायरस के शरीर की कोशिकाओं से चिपकने तथा भीतर प्रवेश करने की क्षमता को रोक देती हैं। ये दोनों एंटीबॉडीज कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन की उन जगहों पर चिपकती हैं जो आपस में संबद्व नहीं है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये एंटीबॉडीज कोरोना के परिवर्तित रूप आमिक्रोन के खिलाफ भी प्रभावी हैं या नहीं।

एस्ट्राजेनेका ने कहा है कि वह एवुशील्ड का ओमिक्रोन के खिलाफ भी परीक्षण कर रही है।

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