निखिल आडवाणी: हमारे बहादुरों को पता था कि उनकी रखवाली करने वाले डॉक्टर, नर्स हैं

मुंबई, 25 नवंबर (आईएएनएस)। निखिल आडवाणी की मुंबई डायरीज 26/11, मोहित रैना और कोंकणा सेन शर्मा अभिनीत हॉस्पिटल ड्रामा सीरीज थी, जिसने आतंक की उन तीन रातों में मुंबई के अस्पतालों में क्रिटिकल केयर डॉक्टरों और नर्सों की भूमिका पर प्रकाश डाला है।

सीरीज में पर्दे के पीछे के काम के बारे में बात करते हुए आडवाणी ने आईएएनएस को बताया, हमें ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं, जिसमें डॉक्टरों और नर्सों ने उन अत्यंत महत्वपूर्ण घंटों के दौरान शानदार काम किया, जिसके कारण कामा और अल्बलेस अस्पताल में लोगों की जान बच गई।

उन्होंने आगे कहा, हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम उन तीन दिनों के लिए युद्ध में थे और जब मुंबई पुलिस, एटीएस और एनएसजी ने शानदार काम किया, उन्हें पता था कि उनकी रखवाली करने के लिए मेडिकल टीम थी, जिसने उन्हें इतनी बहादुरी से स्थिति में जाने की अनुमति दी।

आठ-एपिसोड की सीरीड, जिसमें प्रकाश बेलावाड़ी, सोनाली कुलकर्णी, श्रेया धनवंतरी और सत्यजीत दुबे भी प्रमुख भूमिकाओं में थे। सीरीज में शहर के अस्पतालों में चिकित्सा पेशेवरों और ताजमहल पैलेस होटल के कर्मचारियों की बहादुरी का इतिहास है।

लोगों की जान बचाने के लिए होटल के कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में अपने मेहमानों को अपने खूफिया निकास से निकालकर मौत से बचने में मदद की।

किसी भी शोध-समर्थित फिल्म या ओटीटी सीरीज में कथा विकल्पों को आकार देने और निर्देशक की आवाज को प्रभावित करने के लिए, निष्कर्ष सामग्री को अत्यधिक प्रभावित करते हैं।

ऐसे देश में जहां चिकित्सा पेशेवरों को अक्सर रोगियों के परिचारकों द्वारा हिंसक व्यवहार का शिकार बनाया जाता है। यह नहीं भूलना चाहिए कि डॉक्टर भी इंसान हैं, वे भी किसी अन्य व्यक्ति की तरह भावनाओं के एक ही सेट से गुजरते हैं।

चिकित्सा पेशेवरों के मानवीय पक्ष पर आडवाणी ने आईएएनएस के साथ अपनी बातचीत में कहा, डॉक्टर भी कभी-कभी काफी टूटे हुए होते हैं। हम एक बार भी नहीं सोचते कि मास्क पहनने वाले डॉक्टर के जीवन में क्या हो सकता है, जो हमारा जीवन बचाने के लिए एक कमरे में आता है। बस इसे हम इतना ही मान लेते हैं।

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